एक बार कृष्णदेव राय के चार प्रिय बेशकीमती फूलदानों में से एक फूलदान उनके सेवक रमैया के द्वारा टूट जाता है| कृष्णदेवराय उसे इस मामूली से अपराध के लिए फांसी की सजा सुना देते हैं ,अब तेनाली रामा किस प्रकार अपने चातुर्य से रमैया की जान बचाता है?? साथ ही कृष्णदेवराय को भी किस प्रकार अपनी गलती का एहसास होता है? इस रोचक किस्से को सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी बेशकीमती फूलदान, शिवानी आनंद की आवाज में…
महाभारत के युद्ध में कर्ण के बाणों से युधिष्ठिर का शरीर आच्छादित हो चुका था और उनकी पराजय लगभग तय थी किंतु उसी क्षण ऐसा क्या हुआ युधिष्ठिर अपने प्राण कर्ण के बाणों से बचा पाए ,पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में महाभारत की कहानी में से एक कहानी युधिष्ठिर की पराजय
मीनाक्षी और सुचेता कम समय में ही गहरी मित्र बन चुकी थी। एक दूसरे के मन को समझती थी और हर बात सांझा भी करती। मीनाक्षी को पति से प्रेम न मिलने की बात तो सुचेता जानती थी लेकिन मीनाक्षी किसी और को चाहने लगी है और अपने को पूरी तरह उसके चरणों में समर्पित कर चुकी है ये बात वो सुचेता को कैसे बताए वो समझ नही सकी।
महाभारत की कहानियों में से एक कहानी’ युधिष्ठिर द्वारा दुर्योधन की रक्षा ‘ ,उस समय का प्रसंग है जब पांडवों के वनवास को 11 वर्ष हो चुके थे| दुर्योधन पांडवों को जान से मारने की मंशा से उस जगह जा पहुंचता है जहां पांडवों का वास है ,किंतु ऐसी कुछ घटित होता है कि दुर्योधन को ही युधिष्ठिर की शरण में आना पड़ता है और युधिष्ठिर दुर्योधन के प्राणों की का संरक्षण करते हैं| ऐसा क्या घटित हुआ था कि दुर्योधन को युधिष्ठिर की शरण लेनी पड़ी? शिवानी आनंद की आवाज में सुनते हैं कहानी का पूरा प्रसंग…
पांडु जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर ने अर्जुन को कर्ण का वध न कर पाने के कारण धिक्करा और यहां तक कह दिया कि अगर कर्ण का वध नहीं कर पाते हो तो ,अपना गांडीव धनुष किसी दूसरे योद्धा को दे दो |इस बात को लेकर अर्जुन बहुत क्रोधित हुए और और युधिष्ठिर को मारने के लिए तत्पर हो गए |ऐसी विषम परिस्थिति में किस प्रकार अर्जुन शांत इस हो पाए |महाभारत के रोचक प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी युधिष्ठिर का अपमान ,शिवानी आनंद की आवाज में
मिस्टर राजगोपाल बैंक के कर्मचारी हैं अपने मां-बाप अपनी पत्नी और अपनी बेटी सुप्रिया के साथ भोपाल के जनकपुरी में रहते हैं |सुप्रिया के घर में डकैती पड़ जाती है इस हादसे से सुप्रिया गुमसुम रहने लगती है| दादा दादी सुप्रिया को अपने साथ गांव ले जाते हैं |आगे क्या होता है जानने के लिए सुनते हैं सुप्रिया और सिंहासन बत्तीसी
महाभारत का घमासान युद्ध चल रहा था |युद्ध में दुर्योधन और युधिष्ठिर का आमना -सामना होने पर दोनों के द्वारा शस्त्रों की वर्षा होने लगी| ऐसा समय भी आया जब युधिष्ठिर के प्रहारों से दुर्योधन मूर्छित हो गया |ऐसे समय भीमसेन ने आकर युधिष्ठिर से दुर्योधन का प्राण दान मांगा| आखिर क्या वजह थी कि भीम ने दुर्योधन प्राण –दान, युधिष्ठिर से क्यों मांगा |इसके पीछे की कहानी जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी दुर्योधन का प्राण दान, शिवानी आनंद की आवाज में
राजा कृष्णदेव राय बहुत बड़े कला प्रेमी थे| इस संदर्भ में कलाकारों को तेनाली रामा की सलाह से सम्मानित भी करते थे| इस बात से राज दरबार के अन्य लोग तेनालीरामा से चिढ़ते थे उन्होंने तेनाली रामा के ऊपर रिश्वतखोर होने का आरोप लगा दिया| अब तेनालीरामा ने इस आरोप को कैसे गलत सिद्ध किया ?इस रोचक किस्से को सुनते हैं तेनाली रामा की कहानी में से एक कहानी रिश्वत का खेल सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में….
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