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Navratri Ki Kahaniya
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Navratri Ki Kahaniya

Genre

  • Spiritual

नवरात्रि के 9 दिन मां के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है| शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि मां भगवती की आराधना, संकल्प ,साधना और सिद्धि का दिव्य समय है| नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां के विशिष्ट रूप में समर्पित है| मां भगवती शक्ति का रूप है और माना जाता है कि शक्ति की साधना करने से सभी साधकों के कष्ट दूर हो जाते हैं। नवरात्रि की पूजा के दौरान माता रानी अपने साधकों पर कृपा बरसाती है। मां दुर्गा की कृपा से घर में सुख समृद्धि आती है।

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  • Navratri Ki Kahaniya
  • नवरात्रि पहला दिन - मां शैलपुत्री

    नवरात्रि पहला दिन - मां शैलपुत्री

    • Navratri Ki Kahaniya
    • October 7, 2021
    • 5min 16sec
    नवरात्रि के नौ दिन भक्ति, साधना और आत्मशक्ति के जागरण के लिए अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। इन पावन दिनों की शुरुआत होती है माँ शैलपुत्री की आराधना से — जो हिमालय की पुत्री हैं, और पर्वत की तरह अडिग शक्ति का प्रतीक। हिमालय… जिसे कोई हिला नहीं सकता, जो हर परिस्थिति में स्थिर रहता है। और यही सीख देती हैं माँ शैलपुत्री — कि जब हम भक्ति का मार्ग चुनते हैं, तो हमारे भीतर भी वही अटूट विश्वास और स्थिरता होनी चाहिए। क्योंकि जब मन अडिग होता है… तो हर लक्ष्य संभव हो जाता है। इसीलिए नवरात्रि का पहला दिन समर्पित है — शक्ति के उस प्रथम स्वर को, जो हमें भीतर से मजबूत बनाता है। Chants credit- Jyoti upreti sati
  • नवरात्रि दूसरा दिन - मां ब्रह्मचारिणी

    नवरात्रि दूसरा दिन - मां ब्रह्मचारिणी

    • Navratri Ki Kahaniya
    • October 7, 2021
    • 4min 42sec
    शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन समर्पित है माँ दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप को — तप, त्याग और अडिग संकल्प की देवी। ‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या, और ‘चारिणी’ अर्थात उसका आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी वह शक्ति हैं, जो साधना के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहती हैं। माँ का यह स्वरूप अपने भक्तों और साधकों को अनंत फल प्रदान करता है। इनकी उपासना से जीवन में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम का संचार होता है। पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत दिव्य रूप में विराजमान माँ ब्रह्मचारिणी, अपने दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमण्डल धारण किए हुए हैं जो साधना, धैर्य और आत्मबल का प्रतीक हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सफलता और आत्मशक्ति का मार्ग हमेशा अनुशासन और तपस्या से होकर गुजरता है।
  • नवरात्रि तीसरा दिन - मां चंद्रघंटा

    नवरात्रि तीसरा दिन - मां चंद्रघंटा

    • Navratri Ki Kahaniya
    • October 9, 2021
    • 06min
    नवरात्रि का तीसरा दिन समर्पित है माँ चंद्रघंटा के स्वरूप को — साहस, सौम्यता और संतुलन की अद्भुत देवी। माँ चंद्रघंटा का स्वरूप तपे हुए स्वर्ण के समान कांतिमय है। उनका मुख शांत, सौम्य और तेजस्वी है — जैसे सूर्य की आभा स्वयं उनमें समाहित हो। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र मंदिर के घंटे के आकार में सुशोभित है, इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। माँ अपने वाहन सिंह पर आरूढ़ होकर, दस भुजाओं में खड्ग, तलवार, ढाल, गदा, पाश, त्रिशूल, चक्र और धनुष-बाण धारण किए हुए — मंद-मंद मुस्कान के साथ अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। उनका यह रूप केवल युद्ध का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश देता है कि साहस और शांति साथ-साथ चल सकते हैं। माँ चंद्रघंटा की कृपा से साधक को अलौकिक अनुभव होते हैं — दिव्य सुगंध, सूक्ष्म ध्वनियाँ और एक गहरा आध्यात्मिक स्पर्श। लेकिन इन अनुभवों के बीच साधक को सजग रहना होता है, क्योंकि यही वह क्षण है जहाँ मन की स्थिरता की परीक्षा होती है। उनकी आराधना से व्यक्ति में वीरता और निर्भयता के साथ-साथ सौम्यता और विनम्रता का भी विकास होता है। इसलिए आवश्यक है कि हम अपने मन, वचन और कर्म को शुद्ध करके, पूर्ण श्रद्धा से माँ चंद्रघंटा की शरण में जाएँ। क्योंकि उनकी कृपा से सभी भय दूर हो जाते हैं, पाप नष्ट हो जाते हैं, और जीवन में एक नई निर्भयता का जन्म होता है। माँ चंद्रघंटा — जो कल्याण और शक्ति दोनों का सुंदर संगम हैं। Chants- Jyoti upreti sati
  • नवरात्रि चौथा दिन - मां कुष्मांडा

    नवरात्रि चौथा दिन - मां कुष्मांडा

    • Navratri Ki Kahaniya
    • October 10, 2021
    • 5 min 14 sec
    नवरात्रि का चौथा दिन समर्पित है माँ कूष्मांडा को — सृष्टि की आदिशक्ति, सृजन की दिव्य देवी। मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व भी नहीं था… चारों ओर केवल गहन अंधकार व्याप्त था, तब माँ दुर्गा ने अपनी एक दिव्य मुस्कान से इस ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण माँ कूष्मांडा को सृष्टि की जननी कहा जाता है। माँ का स्वरूप अष्टभुजा है — उनकी आठ भुजाओं में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा विराजमान हैं। आठवें हाथ में जपमाला है, जो साधक को सिद्धियाँ और समृद्धि प्रदान करने का प्रतीक है। माँ कूष्मांडा सिंह पर आरूढ़ हैं, और उन्हें कुम्हड़े का भोग प्रिय माना गया है। संस्कृत में कुम्हड़े को ‘कुष्मांड’ कहा जाता है, इसी से उनका नाम पड़ा — कूष्मांडा। माँ का यह स्वरूप हमें सिखाता है कि सृजन की शुरुआत भीतर की ऊर्जा से होती है। एक सकारात्मक विचार… एक छोटी सी मुस्कान भी नई दुनिया रच सकती है। जब जीवन में अंधकार गहराने लगे, तो याद रखिए — प्रकाश बाहर नहीं, भीतर से जन्म लेता है।
  • नवरात्रि पांचवा दिन-मां स्कंदमाता

    नवरात्रि पांचवा दिन-मां स्कंदमाता

    • Navratri Ki Kahaniya
    • October 10, 2021
    • 06 min 02 sec
    नवरात्रि का पाँचवाँ दिन समर्पित है माँ स्कंदमाता को — ममता, शक्ति और करुणा का दिव्य संगम। माँ स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और शुभ्र आभा से युक्त है। वे वात्सल्य की मूर्ति हैं — एक ऐसी माँ, जो अपने स्नेह से संसार को ऊर्जा देती हैं। मान्यता है कि संतान की प्राप्ति और उसके कल्याण के लिए माँ स्कंदमाता की आराधना विशेष फलदायी होती है। उनकी कृपा से साधारण व्यक्ति भी ज्ञान और चेतना से प्रकाशित हो जाता है। भगवान कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है, उनकी माता होने के कारण ही देवी को स्कंदमाता कहा जाता है। माँ अपने दिव्य स्वरूप में बाल स्कंद को गोद में धारण किए हुए हैं — जो मातृत्व की शक्ति और संरक्षण का प्रतीक है। उनकी चार भुजाएँ हैं — एक भुजा में वे बाल स्कंद को थामे हुए हैं, दूसरी में कमल पुष्प धारण किए हैं, एक हाथ वरदमुद्रा में है, और चौथे हाथ में भी कमल सुशोभित है। शुभ्र वर्ण वाली माँ स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसी कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। सिंह उनका वाहन है, जो उनके साहस और शक्ति का प्रतीक है। माँ स्कंदमाता हमें सिखाती हैं कि सच्ची शक्ति केवल युद्ध में नहीं, बल्कि प्रेम और ममता में भी होती है। माँ की गोद में ही वह शक्ति जन्म लेती है, जो आगे चलकर संसार का मार्गदर्शन करती है।
  • नवरात्रि छठा दिन-मां कात्यायनी

    नवरात्रि छठा दिन-मां कात्यायनी

    • Navratri Ki Kahaniya
    • October 11, 2021
    • 06 min 36 sec
    नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है — न्याय, शक्ति और संकल्प की अधिष्ठात्री देवी। माँ कात्यायनी की उपासना से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — जीवन के चारों पुरुषार्थ सहज ही प्राप्त होते हैं। उनकी कृपा से रोग, शोक, भय और संताप दूर हो जाते हैं, और जन्मों के पापों का नाश होता है। पुराणों के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने भगवती की कठोर तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी कि देवी उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें — और माँ ने उनकी यह इच्छा पूर्ण की। इसी कारण वे कात्यायनी कहलायीं। माँ कात्यायनी को साधना, संकल्प और लक्ष्य की देवी माना जाता है। वे हमें सिखाती हैं कि जब संकल्प दृढ़ हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। उनकी कृपा से कार्य सिद्ध होते हैं, और जीवन सही दिशा पाता है। माँ कात्यायनी — जो शक्ति ही नहीं, मार्गदर्शन भी देती हैं।
  • नवरात्रि सातवां दिन-मां कालरात्रि

    नवरात्रि सातवां दिन-मां कालरात्रि

    • Navratri Ki Kahaniya
    • October 12, 2021
    • 06 min 41 sec
    नवरात्रि का सातवाँ दिन समर्पित है माँ कालरात्रि को — अंधकार के विनाश और निर्भयता की देवी। माँ दुर्गा का यह सातवाँ स्वरूप ‘कालरात्रि’ कहलाता है — अर्थात वह शक्ति, जो घने अंधकार के समान गहरी और प्रचंड है। उनका स्वरूप भयंकर है — बिखरे हुए केश, काले वर्ण की आभा, और गले में विद्युत के समान चमकती दिव्य माला। लेकिन यह रूप भय का नहीं, बल्कि भय के विनाश का प्रतीक है। माँ कालरात्रि वह शक्ति हैं, जो अंधकार, नकारात्मकता और हर प्रकार के भय का अंत करती हैं। कहा जाता है कि उनकी उपस्थिति मात्र से ही भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियाँ दूर भाग जाती हैं। उनके तीन नेत्र हैं, जो समय, सत्य और चेतना के प्रतीक माने जाते हैं। माँ कालरात्रि हमें सिखाती हैं कि सबसे गहरा अंधकार भी उस शक्ति के सामने टिक नहीं सकता, जो भीतर जागृत हो जाए। उनकी आराधना से जीवन के सभी भय दूर होते हैं और साधक निर्भय होकर आगे बढ़ता है। माँ कालरात्रि — जो अंधकार नहीं, अंधकार के अंत का प्रतीक हैं।
  • नवरात्रि आठवां दिन - मां महागौरी

    नवरात्रि आठवां दिन - मां महागौरी

    • Navratri Ki Kahaniya
    • October 13, 2021
    • 06 min 41 sec
    माँ महागौरी — शुद्धता, करुणा और नवआरंभ की देवी नवदुर्गाओं का आठवाँ स्वरूप हैं माँ महागौरी, जिनकी पूजा अष्टमी के दिन विशेष रूप से की जाती है। उनका वर्ण अत्यंत उज्ज्वल और श्वेत है, जो उनकी पवित्रता, शांति और दिव्यता का प्रतीक है। उन्हें चंदन और कमल अर्पित करना अत्यंत प्रिय माना जाता है। माँ महागौरी चार भुजाओं वाली हैं — एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में डमरू, और अन्य दो हाथों में वरमुद्रा और अभयमुद्रा सुशोभित हैं। उनका वाहन वृषभ (बैल) है, जो स्थिरता और शक्ति का प्रतीक है। ‘महागौरी’ का अर्थ है — अत्यंत उज्ज्वल और निर्मल, जो जीवन के हर अंधकार के बाद आने वाली शांति और प्रकाश को दर्शाता है। माँ महागौरी की आराधना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, मन शुद्ध होता है और एक नई शुरुआत का मार्ग प्रशस्त होता है। माँ महागौरी हमें सिखाती हैं कि हर तपस्या के बाद जीवन में उजाला अवश्य आता है।
  • नवरात्रि नौवाँ दिन - मांसिद्धिदात्री

    नवरात्रि नौवाँ दिन - मांसिद्धिदात्री

    • Navratri Ki Kahaniya
    • October 14, 2021
    • 07min 10sec
    माँ सिद्धिदात्री — पूर्णता, ज्ञान और सिद्धि की देवी नवदुर्गाओं का नौवाँ और अंतिम स्वरूप हैं माँ सिद्धिदात्री, जो सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करने वाली मानी जाती हैं। नवरात्रि के नौवें दिन उनकी उपासना की जाती है, और यह दिन साधना की पूर्णता का प्रतीक होता है। मान्यता है कि जो साधक पूर्ण श्रद्धा, विधि-विधान और निष्ठा के साथ माँ सिद्धिदात्री की आराधना करता है, उसे सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। उनकी कृपा से साधक के लिए कुछ भी अगम्य नहीं रहता — ज्ञान, शक्ति और आत्मविश्वास का अद्भुत संगम उसमें जागृत हो जाता है। माँ सिद्धिदात्री हमें सिखाती हैं कि सच्ची सिद्धि बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक जागृति और पूर्णता में निहित है। नवरात्रि का यह अंतिम दिन हमें याद दिलाता है — जब साधना पूर्ण होती है, तो जीवन में ज्ञान और शक्ति का संतुलन स्थापित हो जाता है। माँ सिद्धिदात्री — जो साधना को सिद्धि तक पहुँचाती हैं।
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