अगर मौत मेरे पहले आई… तो मैं मौत को मार डालूंगा!”
ये कोई फिल्मी डायलॉग नहीं… ये वो संकल्प था, जो कैप्टन मनोज कुमार पांडे ने अपनी आत्मा में उतार रखा था।
वो जवान जो शब्दों में आग और आंखों में लक्ष्य लेकर चला था —
जिसे न वीरगति का डर था, न दुश्मन की गोलियों से कोई शिकवा।
उसका सिर्फ़ एक मक़सद था: “तिरंगा वहाँ लहराना है, जहाँ दुश्मन सोच भी न सके।”
परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडे —
उत्तर प्रदेश की धरती पर जन्मा वो सपूत,
जिसने एनडीए इंटरव्यू में ही कह दिया था — “I want to win the Param Vir Chakra.”
और उन्होंने सिर्फ़ सपना नहीं देखा — उसे अपने बलिदान से साकार भी कर दिखाया।
कारगिल की वो बर्फ़ीली रातें, पहाड़ियों की चढ़ाई, दुश्मन के बंकर, और गोलियों की बौछार…
कैप्टन मनोज ने न रुकना जाना, न झुकना।
उन्होंने दुश्मन की पोस्ट्स को अकेले ध्वस्त किया — और आखिरी सांस तक लड़ते हुए वीरगति को गले लगाया।
अब सुनिए Gaatha पर —
“शौर्य गाथा: कैप्टन मनोज पांडे की अमर कहानी”
एक ऐसा ऑडियो अनुभव जो रुलाएगा भी, जोश भी भर देगा… और शायद आपकी सोच भी बदल देगा।
ये सिर्फ़ एक कहानी नहीं, एक प्रेरणा है।
ये सिर्फ़ एक वीरगाथा नहीं, एक राष्ट्र की चेतना है।
और ये सिर्फ़ मनोज की आवाज़ नहीं, भारत माँ की जय का घोष है।
अब सुनिए Gaatha App पर –
अपने कानों से महसूस कीजिए एक अमर शहीद की जीवनी
अब्दुल हमीद मसऊदी (1 जुलाई 1933 – 10सितम्बर 1965)भारतीय सेना की 4 ग्रेनेडियर में एक सिपाही थे जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खेमकरण सैक्टर के आसल उत्ताड़ में लड़े गए युद्ध में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए वीरगति प्राप्त की जिसके लिए उन्हें मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र मिला।युद्ध में शहीद होने से पहले पाकिस्तानी सेना के आठ पैटन टैंको को नष्ट कर लड़ाई का रुख पलट दिया था| पाकिस्तान को भागना पड़ा था और इस तरह से भारतीय सेना को विजय मिली थी
अल्बर्ट एक्का ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लिया था, जहां वह दुश्मनों से लड़ते हुए वे शहीद हो गए थे| मरणोपरांत उन्हें देश की सर्वश्रेष्ठ सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया था|बता दें कि जंग के दौरान उन्हें 20 से 25 गोलियां लगी थी| उनका पूरा शरीर दुश्मन की गोलियों से छलनी हो गया था|
कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया परमवीर चक्र (29 नवंबर 1935 – 5 दिसंबर 1961) एक भारतीय सैन्य अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान के सदस्य थे। वह परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले एकमात्र संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक हैं। वह किंग जॉर्ज के रॉयल मिलिट्री कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र थे।
फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों (17 जुलाई 1943 – 14 दिसंबर 1971) भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी थे। भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 के दौरान पाकिस्तानी वायु सेना के हवाई हमले के खिलाफ श्रीनगर एयर बेस के बचाव में शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से वर्ष 1972 में सम्मानित किया गया।
अक्टूबर 1962 में चीन -भारत युद्ध में पैन्गाॅग झील के उत्तर में मेजर धन सिंह थापा ने 8 गोरखा राइफल्स के प्रथम बटालियन की कमान संभाली। चीनी सेना ने जब इस पोस्ट को घेर लिया था ,ऐसे में मेज़र थापा और उनके साथियों ने इस पोस्ट पर होने वाले तीनों आक्रमणों को असफल कर दिया। युद्ध के दौरान उनके सराहनीय प्रयास के कारण इन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
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